Tuesday, September 14, 2010

फिर चल पड़े उन रास्तों पर , भटक के जिनसे संभलने लगे थे
ये कदम ले आये उन्ही मंजिलों पर , साये से जिनके डरने लगे थे
अजीबो-गरीब हैं ये इश्क के रास्ते , नागिनों से ये डसने लगे हैं
हसरतों के सागर में खोये हम ऐसे , तड़पते-तड़पते डूबने को तरसने लगे हैं
और पार करके ये रास्ते ये सागर आये मिलने भी किससे
जिससे आज हम बिछड़ने लगे हैं

Thursday, August 26, 2010

तेरे ही शहर आके तुझसे दूर हुए
ऐ किस्मत, हम कितने मजबूर हुए
समंदर पार से सुन लेते थे तेरे दिल का हाल
आज तेरी ही गली में तेरी खबर से महरूम हुए
जो गुजरी हमपे ,वो तो वक़्त भुला देगा
याद आ जायें क्या कसूर हुए ।
हाय किस्मत आज हम कितने मजबूर हुए ..







Sunday, June 27, 2010

कुछ मेरे अश्क कुछ तेरी यादें
कितनी प्यारी थी वो मीठी बातें।

कुछ मेरे दामन में उलझे थे काटें,
याद आ रही है वो बीती रातें।

कुछ सोचने से पहले कुछ सोचने के बाद
हमेशा याद रहता है तेरा छूटा हुआ साथ।

कितनी ही रातें कितने दिन गुजर गए,
वो साल याद नहीं जब ये दिन रात कटते ही न थे।

मैंने आँचल में कुछ सपने संजोये थे,
एक चेहरे के साथ सांसों के बंधन जोड़े थे।

अब कुछ धुन्दला सा याद आता है वो चेहरा,
जिसकी कभी हम तस्वीर आँखों में सजाये थे ।

आज हंसी आती है उस दीवानिगी पे,
और कल उस दीवानगी में हम रोया करते थे।
-मोनिका

Saturday, June 19, 2010

कुछ फूल मिले उस डायरी में , जिसमे तेरा जिक्र किया था ॥
याद आ गया वो सब , जिसको भूलने का हमने खुद से वादा किया था।

चंद आंसू भी आ गए , जाने इनका क्या मकसद था ,
दिल से निकले थे ये सताने के लिए, या दिमाग ने भेजा था इन्हें समझाने के लिए ।

ये फूल तो अब सूख गए है, कुछ तो टूट गए है

हमें भी फूलों सा रखा था तुमने , ,
हम भी शायद सूख गए है ,
कुछ तो हम भी टूट गए है।
-मोनिका