कुछ मेरे अश्क कुछ तेरी यादें
कितनी प्यारी थी वो मीठी बातें।
कुछ मेरे दामन में उलझे थे काटें,
याद आ रही है वो बीती रातें।
कुछ सोचने से पहले कुछ सोचने के बाद
हमेशा याद रहता है तेरा छूटा हुआ साथ।
कितनी ही रातें कितने दिन गुजर गए,
वो साल याद नहीं जब ये दिन रात कटते ही न थे।
मैंने आँचल में कुछ सपने संजोये थे,
एक चेहरे के साथ सांसों के बंधन जोड़े थे।
अब कुछ धुन्दला सा याद आता है वो चेहरा,
जिसकी कभी हम तस्वीर आँखों में सजाये थे ।
आज हंसी आती है उस दीवानिगी पे,
और कल उस दीवानगी में हम रोया करते थे।
-मोनिका