मेरे शीशमहल के ढेर पर, कैसे अपना स्वर्ण महल बनाओगे
मेरे ह्रदय के इन टुकड़ों पर तुम कैसे चल पाओगे .
चुभेंगे हर पग , चौंधा देंगे आँखों को
और कभी तो ये ह्रदय को भी उकसा देंगे
यद् दिलाएंगे हर पल, कि
बिछ गया मेरे सपनो का शीश महल उनके क़दमों पर
जिनके ह्रदय को स्वर्ण समझ, हम स्वर्ण महल भी छोड़ आये
अब कैसे वो मेरे शीश महल पर, अपना महल बनायेंगे
मेरे ह्रदय के इन टुकड़ों पर वो कैसे चल पाएंगे
मेरे ह्रदय के इन टुकड़ों पर तुम कैसे चल पाओगे .
चुभेंगे हर पग , चौंधा देंगे आँखों को
और कभी तो ये ह्रदय को भी उकसा देंगे
यद् दिलाएंगे हर पल, कि
बिछ गया मेरे सपनो का शीश महल उनके क़दमों पर
जिनके ह्रदय को स्वर्ण समझ, हम स्वर्ण महल भी छोड़ आये
अब कैसे वो मेरे शीश महल पर, अपना महल बनायेंगे
मेरे ह्रदय के इन टुकड़ों पर वो कैसे चल पाएंगे